पहेलियाँ – Paheliyan in Hindi

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Paheliyan In Hindi :- आज हम आपके लिए ऐसी पहेलियां लेकर आए हैं, जिसका उत्तर हमारी रोज की जिंदगी में शामिल है । जाने पहचाने है वो ,शब्द फिर भी लगते है, अनजाने। तो आइये उन पहिलियो से रूबरू होते है।


Paheliyan In Hindi 

1:- प्रथम कटे, तो मन बनू अंत कटे तो मूल्य।

मध्य कटे तो सुकर्म हो ऐसा जीत ले,

सबका दिल।

उत्तर :- दामन

2:- उल्टा करो नदी की धारा ,सीधा रखो तो देवी।

पितांबर के साथ रहूं मैं ,नाम बताओ बेबी।

उत्तर:- राधा

3:- अन्त कटे तो मानव हूं, प्रथम कटे तो नम हो जाऊ।

मध्य कटे तो जम जाऊ, बोलो मैं क्या कहलाऊं ?

उत्तर :- जनम

4:- प्रथम कटे, तो नया बनू, अन्त काट दो मान करू।

तीन अक्षर का कौन हूं मैं ,सृष्टि का सम्मान करू।

उत्तर :- मानव

5:- प्रथम कटे तो जल बनकर, मैं सबको जीवन देता हूं ।

मध्य काट कर काल बनूं ,सब का जीवन हर लेता हूं ।

तीन अक्षर, काम मेरा ऐसा ,आंखों को ठंडक देता हूं।

उत्तर:- काजल



6:- आदि कटे तो दशरथ सुत हूं ,मध्य कटे ,तो आम ।

अंत कटे तो शहर बना इक, बुझो मेरा नाम।

उत्तर :- आराम

7:- तीन अक्षर का मेरा नाम ,हवा में जाओ करूं सलाम।

मध्य कटे बनू कदम ,प्रथम कटे तो कर दे तंग।

नाम बताओ मेरा तुम ,15 अगस्त से मेरा संबंध।

उत्तर:- पतंग

8:- तीन पैर की चंपा रानी, रोज नहाने जाती।

दाल भात का स्वाद न जाने ,कच्चा आटा खाती।

मध्य काट दो तो मैं चला ,प्रथम कटे जाऊं कला।

बच्चों अब तो बतला दो, क्या है मेरा नाम भला ?

उत्तर :- चकला

9:- अन्त कटे तो सूर हुआ मैं ,प्रथम कटा तो धूल।

मुझसे ही है दिन और राते जीवन का हूं मूल।

उत्तर :- सूरज

10:- न काशी न काबा धाम, जिसके बिना हो चक्का जाम।

पानी जैसी चीज है वह , झट, बतलाओ  उसका नाम।

उत्तर:- पेट्रोल

11:- पीली हरी हवेली एक, उसमे बैठे कालू राम।

पेट साफ करता हूं मैं ,बोलो बहू मेरा नाम।

उत्तर :- पपीता

12:- पानी से वह बन जाती, दुनिया को है चमकाती,

जमकर है सेवा करती, क्रोधित हो जीवन हरती,

सभी घरों में रहती है पर आती-जाती रहती है।

उत्तर :- बिजली

13:- मेरे पुछ पर हरियाली, तन है मगर सफेद।

खाने के हूं काम आती, अब बोलो मेरा भेद।

उत्तर :- मुली

14:- चार खंबे चलते जाए ,सबसे आगे अजगर।

पीछे सबके साप चल रहा, फिर भी तनिक नहीं है डर।

उत्तर :- हाथी

15:- पीला पीला रंग मेरा ,गोल मटोल शरीर।

बड़े-बड़े वीरों के दांत करूं खट्टे महावीर।

उत्तर :- नींबू



16:- दुबली पतली दे है, पर पहने काले कपड़े।

धूप से करें दो दो हाथ और पानी से झगड़े।

उत्तर :- छतरी

17:- बीमार नहीं रहती फिर भी मैं मुंह में रखे गोली ।

अच्छे-अच्छे डर जाते हैं ,सुनकर मेरी बोली।

उत्तर :- बंदूक

Paheliyan In Hindi

18:- दो पैरों का मैं हूं घोड़ा ,चलता हूं पर थोड़ा थोड़ा।

जो भी मेरे बीच में आए झट से कांटा ,फट से तोड़ा।

उत्तर :- सरौता

19:- आंखें मूंद के खाते हैं, और खाकर पछताते हैं ।

जो कोई पूछे क्या था वो, तो कहते शरमाते हैं।

उत्तर :- धोखा

20 :- आज यहां कल वहां रहे ,नहीं किसी के पास रुके।

और रुक जाए किसी के घर, तो फिर घुमा देता है सर।

उत्तर :- पैसा

21 :- बड़े-बड़े हूं को राह दिखाऊं, कान पकड़कर उन्हें पढाऊ।

साथ में उनकी नाक दबा फिर भी मैं अच्छा कहलाऊं।

उत्तर :- चश्मा

22:- आसमान में उड़ पड़े पर घोसला न बनाएं।

तूफान से डरे  रहने को ,धरती पर आ जाए।

उत्तर :- हवाई जहाज

23 :- सात रंग की एक चटाई ,बारिश में देती दिखाई ।

उत्तर :- इंद्रधनुष

24 :- एक लाठी की अजब कहानी ,उसके भीतर मीठा पानी।

उस लाठी में गाठे 10 जो चाहे वो,पीले रस।

उत्तर :- गन्ना

25:- जादू के डंडे को देखो, न तेल न पानी।

पलग झुकाते तुरंत रोशनी सभी और फैलानी।

उत्तर :- ट्यूबलाइट



26:- एक पैर है, काली धोती, सर्दी में हरदम सोती।

सावन में रोती रहती है ,गर्मी में छाया देती।

उत्तर :- छतरी

27 :- हर घर में नजर हूं आता, सब बच्चे को खूब हूं, भाता।

दूर का हूं लगता मामा ,रूप बदलता पर मन भाता।

उत्तर :- चंद्रमा

28 :- वहां भी हूं, यहां भी मैं, इधर भी हूं, उधर भी हूं।

नजर में आ नहीं सकती किसी किसी को भी जिधर भी हूं।

कर कोशिश अगर जबरन तो आंखें बंद हो जाए।

अगर मैं मिलना पाऊं, तो सभी बेमौत मर जाए।

उत्तर :- हवा

29 :- कभी रहूं तेरे पीछे, कभी चलूं तेरे आगे।

मुझको कभी ना पकड़ सके, तू चाहे जितना भागे।

फिर भी हर पल साथ तेरे, फिर भले हाथ में हाथ न हो।

अंधियारे से डरती हूं, बस उजियाले में मन लागे।

उत्तर :- परछाई

30:- वाणी में गुण बहुत है ,पर मुझसे अच्छा कौन ?

सा रे जगड़ो को टालू बतलाओ में कौन ?

उत्तर :- मौन

31 :- गोल गोल में घूम रही ,गोल गोल काटू चक्कर।

सब कहते हैं मुझको माता ,फिर भी रखे कदमों पर।

उत्तर :- धरती

32 :- कोई कहे मुझे आंसू ,कोई कहे मुझको मोती,

सरीसर्प मुझे चाट लेते, मैं जब भी पत्तों पर।

उत्तर :- ओस

33 :- गागर में जैसे सागर ,वैसे मैं मटके के अंदर।

जटा जूट और बैढगा ,ऊपर काला अंदर गोरा पानी।

पानी हूं मीठा ठंडा, रहता हूं लंबे पेड़ों पर।

उत्तर :- नारियल

34 :- शर्ट, कोट, कुर्ता, कमीज सब मुझसे शोभा पाते।

ना हूं मैं, तो तन पर कपड़े धारण न कर पाते।

उत्तर :- बटन

35 :- चार पैर रखती हूं ,लेकिन कहीं ना जाती हूं।

ऑफिस हो या हो संसद ,हर जगह फंसा कर आती हूं।

उत्तर :- कुर्सी

36 :- लकड़ी का एक किला है भैया, चार कुएं हैं बिन पानी।

उसमें बैठे चोर अठारह संग लिए एक रानी।

एक दरोगा भारी-भरकम, सब चोरों को मारे।

रानी को भी कुएं में डाल, खूब करे मनमानी।

उत्तर :- कैरम



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