लोमड़ी की कहानी In Hindi

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Lomdi Ki Kahani

Lomdi Ki Kahani :- आज हम आपके लिए लोमड़ी की कहानी लेकर आए हैं। यहां पर आज हम आपको लोमड़ी की दो अलग-अलग कहानियां बताएंगे। इन कहानियों को बहुत ध्यान से पढ़ें , क्योंकि इससे आपको बहुत अच्छी शिक्षा मिलेगी।

Lomdi Ki Kahani 

एक जंगल में एक बहुत ही बदमाश और चालाक लोमड़ी रहती थी। वो अपनी चालाकी से जंगल में रहने वाले भोले भाले छोटे-छोटे जानवरों को अपने बातों में फंसा कर उनका शिकार करती थी। एक दिन लोमड़ी सोचती है , बस अब बहुत हुआ वह अब छोटे-छोटे जानवरों का शिकार नहीं करेगी अब वो बड़े-बड़े जानवरों को मारकर खाएंगी।

फिर वह एक बड़े से जानवर का शिकार करने के लिए अपने घर से निकलती है। जब वह अपने शिकार की तलाश में इधर-उधर घूम रही होती है | तभी उसकी नजर एक गधे पर पड़ती है। उस गधे को देखकर लोमड़ी यह समझ जाती है , कि वह गधा उसके जंगल का नहीं है, क्योंकि आज से पहले तो लोमड़ी ने उस गधे को पहले कभी नहीं देखा था।

लोमड़ी मन ही मन यह सोचती है , कि इसे तो अपने बातों में फंसाना बहुत ही आसान है। ये जंगलों के दूसरे जानवरों से मिले और दूसरे जानवर इसे मेरे बारे में बताएं उसके पहले ही मैं इसे बेवकूफ बनाकर इसे अपना शिकार बना लेती हूं।

लोमड़ी गधे के पास जाती हैं और गधे से कहती है , भाई क्या तुम मेरी मदद करोगे ? मेरे बच्चे खेलते खेलते कहीं दूर चले गए हैं। गधा बेचारा बहुत ही सीधा साधा था। वो बहुत आसानी से किसी की भी बातों पर विश्वास कर लेता था। लोमड़ी की बात सुनकर गधा भी उसकी मदद के लिए तैयार हो जाता है और कहता है , हां बहन क्यों नहीं चलो , मैं तुम्हारे बच्चों को ढूंढने में तुम्हारी मदद करता हूं।

पर उस बिचारे गधे को क्या पता था , कि लोमड़ी उसे बेवकूफ बना रही है और वह उसे ले जाकर मार डालेगी। फिर गधा उसके साथ चलने लगता है।

लोमड़ी गधे को जानबूझकर जंगल के सुनसान इलाके की तरफ ले जाती है। रास्ते में चलते हुए लोमड़ी गधे से कहती है , भाई मैंने तो तुम्हें पहले इस जंगल में कभी नहीं देखा है। तो गधा कहता है- हां तुम बिल्कुल ठीक बोल रही हो बहन , मैं इस जंगल का नहीं हूं | मैं तो दूसरे जंगल का हूं , यहां अपने रिश्तेदारों से मिलने आया हूं।

गधे की बात सुनकर लोमड़ी बहुत ही खुश हो जाती है और सोचती है , अगर मैं इसे मार कर खा जाऊंगी तो किसी को पता भी नहीं चलेगा। फिर एक सुनसान इलाके में जाकर लोमड़ी गधे पर हमला करती है। गधा कुछ समझ नहीं पाता , लेकिन जैसे तैसे वहां से अपनी जान बचा कर भाग जाता है। भागते भागते गधा जोर जोर से चिल्लाने लगता है बचाओ ! बचाओ ! बचाओ ! गधे की आवाज सुनकर जंगल के दूसरे जानवर भी अपने घर से बाहर निकल कर आते हैं।

लोमड़ी को गधे के पीछे भागते हुए देखकर जंगल के सभी जानवर ये समझ जाते हैं , कि आज लोमड़ी ने फिर से एक जानवर को बेवकूफ बनाकर शिकार बनाने की कोशिश की है। सभी जानवर मिलकर गधे की जान बचा लेते है। फिर सभी जानवर लोमड़ी को घेर लेते हैं और उससे कहते हैं , तुम हमेशा ही ऐसे ही सबको बेवकूफ बना कर अपना शिकार करती हो। चली जाओ यहां से आज के बाद हमारे जंगल में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है। उसके बाद सभी जानवर मिलकर लोमड़ी को खूब दौड़ाते हैं और उसे जंगल से बाहर निकाल देते हैं।

शिक्षा :- इस कहानी ( Lomdi Ki Kahani ) से हमें यह शिक्षा मिलती है , कि हम चाहे कितनी भी अच्छी तरह से झूठ क्यों ना बोले एक ना एक दिन सच सामने जरूर आता है और किसी के भी साथ बुरा करने का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है।


लोमड़ी और सारस की कहानी

Chalak Lomdi Ki Kahani In Hindi 

एक गांव के जंगल में एक चतुर लोमड़ी रहती थी | लोमड़ी हमेशा सभी को अपनी चतुराई से मूर्ख बना देती थी।  लोमड़ी की चतुराई को कोई समझ नहीं पाते थे और आसानी से मूर्ख बन जाता था।

लोमड़ी का दोस्त था सारस , जो बहुत ही सीधा था। वह लोगों को मूर्ख बनाना नहीं जानता था और लोगों से बहुत ही प्यार से बात करता था।

1 दिन लोमड़ी सोची कि, क्यों ना आज सारस को बेवकूफ बनाया जाए ?  लोमड़ी सारस से बोली,  ” प्रिय मित्र सारस तुम मेरे सबसे प्यारे दोस्त हो , मैं तुम्हें अपने घर खाने के लिए निमंत्रण देने आई हूं , तो तुम कल जरूर आना “।

सारस बिना ज्यादा कुछ सोचे समझे लोमड़ी के घर जाने के लिए तैयार हो गया।

अगले दिन सारस, लोमड़ी के घर आता है लोमड़ी ने स्वादिष्ट खीर बनाई हुई थी | लोमड़ी बहुत अच्छे से सारस का स्वागत करके उसे घर में बैठाई। कुछ समय के बाद लोमड़ी ने सारस को बुलाया और खाना परोसने लगी।

लोमड़ी ने खीर चौड़े बर्तन में परोसी , जिसके कारण लोमड़ी तो बहुत अच्छे से खीर खा पा रही थी | लेकिन सारस अपने चोंच के कारण खीर खा नहीं पा रहा था और कुछ समय बाद लोमड़ी अपना सारा खीर खत्म कर ली, और सारस देखता रह गया।

लोमड़ी सारस से बोली, ” क्यों भाई सारस तुमने तो कुछ खाया ही नहीं ” ?  सारस लोमड़ी की चालाकी को समझ गया था और अपने आप को बहुत अपमानित महसूस कर रहा था , लेकिन उस समय वह कुछ नहीं कर सकता था | इसलिए उसने लोमड़ी से कहा ” नहीं बहन , आज मुझे भूख नहीं है “।

फिर उसके बाद सारस अपने घर चला गया और लोमड़ी से अपने अपमान का बदला लेने के बारे में सोचने लगा। सारस ने सोचा , ” मुझे ऐसा दोस्त नहीं चाहिए जो मेरा अपमान करे , मेरी कोई इज्जत ना करे , आज जो उसने किया है मेरे साथ उसका बदला मैं लेके रहूँगा “। फिर उसे एक उपाय सूझा। सारस ने अगले दिन लोमड़ी को अपने घर दावत पर आमंत्रित किया और कहा , ” मेरी प्रिय बहन लोमड़ी तुमने मुझे इतना अच्छा खाना खिलाया अब मेरी बारी है , तो अब तुम मेरे घर दावत में आना। ”

लोमड़ी ने सारस के आमंत्रण को झट से स्वीकार कर लिया और फिर लोमड़ी अगले दिन सारस के घर में दावत के लिए पहुंच गई। सारस ने भी लोमड़ी का बहुत अच्छे से स्वागत किया और फिर सारस ने भी लोमड़ी के लिए खीर बनाया था और उसे भी कुछ समय इंतजार कराने के बाद खीर खाने के लिए बुलाया।

सारस ने पतले मुंह वाल बर्तन में लोमड़ी को खीर परोसा जिसके कारण सारस तो बड़ी आसानी से चोंच से खीर खा सकता था, लेकिन लोमड़ी का मुंह खीर तक नहीं पहुंच सकता था। सारस को ये देखकर बहुत मज़ा आ रहा था।

सारस अपना खीर खाकर खत्म कर दिया लेकिन लोमड़ी खीर का मज़ा ले ही नहीं पाई । फिर सारस ने लोमड़ी से कहा , ” क्यों बहन तुम्हें आज भूख नहीं है क्या ? ”

लोमड़ी को सारस की बातों को सुनकर अपनी गलती का एहसास हुआ और वह तुरंत उठकर वहां से चली गई।

सीख :- इस कहानी ( Lomdi Ki Kahani ) से हमें ये सीख मिलती हैं , कि कभी किसी के आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचाना चाहिए।

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