Champak Stories In Hindi | Stories Of Champak In Hindi

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Champak Stories In Hindi

Champak Stories In Hindi :- यह कहानी बहुत ही बदमाश बंदर की है , जिसका नाम था भूरा| भूरा बंदर बाकि जानवरों के साथ चंपक वन में रहता था| वन के सारे जानवर बंदर से बहुत ही परेशान हो चुके थे , क्योंकि वह आए दिन कोई न कोई शैतानी करके सब को परेशान करता था| उसकी शैतानियां बहुत ही बुरी होती थी , जो बाकी जानवरों की भावनाओं को आहत करती थी | भूरा बंदर कभी किसी की नहीं सुनता था, सब उसे बहुत समझाते थे पर फिर भी उसकी शैतानियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी| वह छोटे बड़े का भी लिहाज नहीं करता था और अपने से बड़े लोगों का भी मजाक बना देता था| वह स्कूल में भी बाकि जानवरों के साथ-साथ अपने अध्यापक को भी परेशान करता|

एक दिन उसने सोचा कि क्यों ना वह अपने गणित के टीचर भालू को परेशान करें| क्योंकि भालू सर ने भूरा बंदर को होमवर्क ना करने पर बहुत जोर से फटकार लगाई थी | इसीलिए वह उनसे बदला लेना चाहता था| एक दिन बंदर ने भालू सर के सीट में खुजली वाली पत्तियां रगड़ दी और जैसे ही भालू सर उस सीट पर बैठे उनके पूरी शरीर में खुजली होने लगी| ऐसा करने के बाद भूरा बंदर जोर जोर से हंसने लगा| भालू सर ने उसे बहुत चिल्लाया पर फिर भी उसकी शैतानियो में कोई कमी नहीं आई|

अगले दिन उसने गोरी बंदरिया का लंबा पूछ एक स्टूल से बांध दिया| जब गोरी बंदरिया उस स्टूल से उठी और चलने लगी तो वह स्टूल भी उसके साथ घिसटने लगा| क्लास के सारे बच्चे जोर-जोर से हंसने लगे और गोरी बंदरिया को बहुत शर्म आ रही थी और वह रोते हुए अपने घर चली गई पर फिर भी बुरा बंदर को अपनी गलती का कोई एहसास नहीं था|

एक दिन तो भूरा ने शैतानियां करने की सारी हदें ही पार कर दी|  स्कूल में लंबू जीराफ का जन्मदिन था और वह अपने दोस्तों को बांटने के लिए खूब सारी टॉफिया लाया था| जब भूरा बंदर को यह बात पता चली तो उसने एक प्लान बनाया| उसने चुपचाप लंबू के टाफि वाले डिब्बे से सारी टॉफियां निकाल कर खुद रख ली और उसके डिब्बे में खूब सारी मकड़िया डाल दी| जब लंबू अपने दोस्तों को टॉफियां देने के लिए वह डिब्बा खोलता है , तो वह बहुत जोर से डर जाता है और उसके सारे दोस्त उस पर हंसने लग जाते हैं| पूरे कक्षा में लंबू जिराफ का मजाक बन जाता है| इसी तरह भूरा अपने संगीत के टीचर को भी बेसुरा कह देता था , जबकि वह टीचर बहुत मीठा गाती थी और क्लास के सारे बच्चे उसे बहुत पसंद करते थे| 

एक दिन भूरा बंदर देखता है , कि उसके सामने लंबू जिराफ आ रहा है जिसके पैर में लग गई है और इसलिए वह लंगड़ा रहा है| मौके का फायदा उठाकर भूरा बंदर लंबू जिराफ को लंगड़ा लंगड़ा चिड़ाता है| लंबू को भूरा पर बहुत गुस्सा आ रहा था पर फिर भी वह उसे जाकर समझाना चाहता था , कि वह ऐसा ना कहें| जैसे ही लंबू भूरा के पास जाता है , भूरा बंदर को यह लगता है , कि वह उसे मारने आ रहा है और इसीलिए वह लंबी छलांग लगाकर रोड के उस पार जाने की कोशिश करता है पर तभी वह गाड़ी के नीचे आ जाता है और उसका बहुत बुरा एक्सीडेंट हो जाता है| सारे जानवर भूरा को घेर कर खड़े हो जाते हैं और लंबू भी वहां आता है| लंबू को भूरा पर बहुत दया आती है , क्योंकि उसकी हड्डियां टूट गई थी और बहुत खून भी बह रहा था|

लंबू तुरंत भूरा को हॉस्पिटल पहुंचाने का बंदोबस्त करता है | जहां पर भूरा का ऑपरेशन किया जाता है और उसकी जान बचा ली जाती है| लंबू जीराफ भूरे बंदर के माता-पिता को भी बुला लेता है| भूरा का ऑपरेशन डॉक्टर कालूराम गोरिल्ला और उनकी नर्स पूसी द्वारा किया जाता है| डॉक्टर कालूराम गोरिला , भूरा को बताते हैं , कि आज वह जिंदा है तो सिर्फ लंबू जिराफ के कारण| अगर लंबू उसे समय पर अस्पताल नहीं लाता तो उसके साथ बहुत बुरा होता| भूरा बंदर लंबू जिराफ का दिल से धन्यवाद करता है और कसम खाता है , कि अब वह उसे और जंगल के किसी भी जानवर को परेशान नहीं करेगा| भूरा को अपनी गलती समझ आती है और वह प्रायश्चित करने के लिए जंगल के हर एक जानवर से माफी मांगता है , जिसे उसने परेशान किया था|

शिक्षा:- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है , कि चाहे हमारे साथ कोई भी कितना भी बूरा करें हमें अपनी अच्छाई और इंसानियत नहीं भूलनी चाहिए और सब के साथ प्यार से रहना चाहिए| क्योंकि प्यार ही वह तरीका है , जिसके जरिए हम एक बिगड़े हुए जीव को फिर से सुधार सकते हैं|

Champak Stories In Hindi | Stories Of Champak In Hindi

लालची बिल्ली ( Champak Stories In Hindi )

यह कहानी है , एक बिल्ली की जो बहुत दिनों से शहर में रह रही थी| अब बिल्ली को शहर कुछ रास नहीं आ रहा था , क्योंकि वहां पर उसे खाना ढूंढने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी| इसलिए बिल्ली यह निर्णय लेती है , कि वह अब जंगल में रहेगी|

एक दिन बिल्ली शहर को अलविदा करके हमेशा के लिए जंगल मे रहने के लिए निकल जाती है| जब बिल्ली जंगल पहुंचती है तो उसे एक लोमड़ी मिलती है| जब लोमड़ी को पता चलता है , कि उनके जंगल में एक नया सदस्य आया है | तो वह बिल्ली का बहुत अच्छे से स्वागत करती है| बिल्ली लोमड़ी से कहती है , कि वह बहुत दूर से चलकर आई है , तो क्या उसे कुछ खाने के लिए मिल सकता है|

तो लोमड़ी बिल्ली को उसके घर ले जाती है और खूब सारा अच्छा-अच्छा खाना खिलाती है| अब लोमड़ी और बिल्ली दोस्त बन जाते हैं और लोमड़ी बिल्ली से कहती है , कि कभी भी उसे किसी चीज की जरूरत होगी , तो वह उसके घर आ सकती है और उसकी मदद ले सकती है|

लोमड़ी बिल्ली को जंगल के बाकी जानवरों से भी मिलाती है और उनसे उसकी दोस्ती कराती है| उसके बाद बिल्ली वहां से चली जाती है| बिल्ली उस दिन बहुत खुश होती है , क्योंकि उसने लोमड़ी के घर पर पेट भर खाना खाया था और उससे पहले उसने कभी इतना स्वादिष्ट भोजन नहीं खाया था|

अगले दिन जब बिल्ली को फिर से भूख लगती है तो वह लोमड़ी के घर जाती है और जब लोमड़ी घर में नहीं होती है , तो वह मौका पाकर उसका सारा खाना खा जाती है| बिल्ली बहुत आलसी हो गई थी | वह खुद से खाना नहीं खोजना चाहती थी और इसीलिए कुछ दिनों तक वह लोमड़ी के घर से खाना चुरा कर ही खाने लगी |

एक दिन लोमड़ी को बहुत गुस्सा आया| उसे बिल्कुल समझ नहीं आ रहा था , कि उसका खाना गायब कैसे हो जाता है| उसने निर्णय किया , कि वह एक पूरा दिन अपने घर पर ही रहेगी , ताकि वह चोर को पकड़ सके| लोमड़ी अपने घर पर छिप जाती है और थोड़ी देर बाद वह देखती है , कि हमेशा की तरह बिल्ली आकर चोरी चुपके उसका खाना खा रही होती है|

लोमड़ी बिल्ली को रंगे हाथों पकड़ लेती है और उसे बहुत भला बुरा सुनाती है| वह बिल्ली से कहती है , कि तुम्हें अच्छा समझ कर मैंने तुम्हें अपना दोस्त बनाया था , पर वह एक बूरी बिल्ली है , जो चोरी करके अपना पेट भर्ती है| लोमड़ी बिल्ली से अपनी दोस्ती भी तोड़ देती है| लोमड़ी की बात सुनकर बिल्ली को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था| उसे तो बस इस बात की चिंता थी , कि अब वह खाना कहां से खाएगी| इसीलिए अब बिल्ली जंगल के बाकी जानवरों के घरों से खाना चुराने लगी| जैसे ही वह कोई सुना घर देखती वह उसके घर से खाना चुरा लेती|

बिल्ली जंगल में रहकर भी बिल्कुल शहर में खाना चुराने वाली हरकतें कर रही थी| जब सबके घर से खाना चोरी होने लगा तो जंगल के राजा शेर ने सारे जानवरों की एक मीटिंग बुलाई| यह मीटिंग गुप्त रखी गई थी और इसमें बिल्ली को नहीं बुलाया गया था , क्योंकि सबको पता था , कि चोर तो वही है| मीटिंग में यह निर्णय लिया गया , कि अगले 4 दिनों तक कोई भी जानवर अपने घर से बाहर नहीं निकलेगा ताकि बिल्ली उनके घर से खाना चोरी ना कर सके| यही बिल्ली की सबक होगी और तभी वह खुद के लिए खाना खोजना सीख पाएगी| सारे जानवर इस बात पर सहमति दिखाते हैं| 

अगले दिन से बिल्कुल ऐसा ही होता है| एक-एक करके पूरे 4 दिन निकल जाते हैं और बिल्ली अपने खाने का कोई इंतजाम नहीं कर पाती और 4 दिनों तक भूखे रहने की वजह से वह बहुत ही बीमार पड़ जाती है और बेहोश हो जाती है| अब बाकी जानवरों को बिल्ली की व्यथा देखकर उस पर बहुत दया आती है और वो सब मिलकर उसका इलाज करते हैं| सब अपने घरों से थोड़ा-थोड़ा खाना लाते हैं और कुछ लोग दवाई भी लाते हैं|

दो दिनों बाद बिल्ली एकदम स्वस्थ हो जाती है और उसे होश आ जाता है| जब बिल्ली को समझ आता है , कि सारे जानवरों ने रात दिन सेवा करके उसकी जान बचाई है तो उसे खुद के किए पर बहुत शर्म आती है| वह सारे जानवरों से माफी मांगती है और उसकी जान बचाने के लिए उनका धन्यवाद भी करती है| बिल्ली को अपने किए पर बहुत पछतावा होता है और वह बाकी जानवरों को यह भरोसा दिलाती है कि वह आगे से अपना खाना खुद हो तलाशेगी और मुश्किल के समय दूसरों के काम भी आएगी बिलकुल वैसे ही जैसे उन सब ने मिलकर उसकी मदद की|

शिक्षा:- इस Champak Stories In Hindi से हमें यह सीख मिलती है , कि अगर हम किसी के साथ बुरा करेंगे अंत में हमारे साथ भी बुरा होगा| ज्यादा लालच बुरी बला होती है| हमें अपना काम खुद करना आना चाहिए और किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए , क्योंकि जब हम दूसरों पर निर्भर रहते हैं , तो हम कभी जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पाते|

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