अकबर बीरबल की कहानियां Akbar Birbal Short Stories In Hindi

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Akbar Birbal Short Stories In Hindi

आज की इस लेख में हम आप लोगों के साथ अकबर बीरबल की कहानियां ( Akbar Birbal Short Stories In Hindi ) बताने वाले हैं | आपको यहां पर अकबर बीरबल सभी कहानियां मिलेगी |

Akbar Birbal Short Stories In Hindi  

1 :- बीरबल की चालाकी

शहंशाह अकबर के राज्य में एक सौदागर रहता था | वह बहुत ही चतुर था | उसने अपनी ईमानदारी और मेहनत से बहुत सारे धन इकट्ठे किए थे | वह उस धन को इकट्ठा करके एक संदूक में रखता था | जिसकी चाबी वह अपने तकिए के नीचे छुपा कर रखता था | उसे अपने धन से बहुत लगाव था | उसे हमेशा उसके धन के चोरी होने का डर सताता था |

एक दिन सुबह उठकर हमेशा की तरह सौदागर अपने संदूक के पास जाता है | वह देखता है , कि संदूक का ताला गायब है | वह डर जाता है और जब वह संदूक खोल कर देखता है , तो उसमें से उसका सारा धन गायब था | वह सौदागर अपनी सिपाही को बुलाता है और उससे पूछता है , कि क्या कल रात उसने किसी अजनबी को उसके घर आते देखा ? सिपाही कहता है कि उसने कल रात किसी को भी नहीं देखा | सौदागर बहुत दुखी हो जाता है | उसे अपना धन वापस चाहिए था और इसीलिए वह शहंशाह अकबर के पास जाता है |

सौदागर शहंशाह अकबर को अपनी सारी व्यथा सुनाता है और उनसे अपना धन वापस दिलाने की विनती करता है | शहंशाह अकबर सौदागर की सारी बात सुनते हैं और वह यह काम बीरबल को सौंप देते हैं | बीरबल कहते हैं , कि उन्हें लगता है कि यह काम किसी घर वाले का ही है , क्योंकि इतनी सफाई से चोरी वही कर सकता है , जिसे पता हो कि संदूक की चाबी कहां रखी होती है | बीरबल कहते हैं , कि हो ना हो यह काम सौदागर के किसी सेवक का ही है |

वह सारे सेवकों को शहंशाह के दरबार में बुलाते हैं | बीरबल उन सब सेवकों को एक-एक लकड़ी देते हैं और कहते हैं , कि यह एक जादुई लकड़ी है | जिसे वह एक बहुत ही पहुंचे हुए बाबा से लेकर आए हैं | सारे सेवकों को यह लकड़ी अपने पास एक रात के लिए रखनी होगी और जिसकी भी लकड़ी एक माप लंबी हो जाएगी वह चोर साबित हो जाएगा | शहंशाह अकबर अगले दिन दरबार में सारे सेवकों को अपनी अपनी लकड़ी लेकर हाजिर होने का आदेश देते हैं |

अगले दिन सौदागर के सारे सेवक दरबार में हाजिर होते हैं , अपनी लकड़ियां लेकर | बीरबल उन सारे सेवकों की लकड़ियां लेता है और उन्हें देखने के बाद वह बड़ी ही आसानी से बता देता है , कि चोर सिपाही है | सौदागर पूछता है , कि यह कैसे संभव है ? आपको यह कैसे पता चला ?

बीरबल कहता है , कि मैंने झूठ कहा था यह कोई जादुई लकड़ी नहीं है | पकड़े जाने के डर से सिपाही ने लकड़ी को एक माप काट दिया | क्योंकि उसे लगा था , कि उसकी लकड़ी एक माफ बढ़ गई होगी और इसीलिए अब असली गुन्हेगार का पता हमें चल गया है | वह सिपाही अपना चोर होना स्वीकारता है और अपने मालिक से माफी मांगता है | वह अपने मालिक को उसका सारा धन वापस लौटा देता है और सौदागर उसे काम से निकाल देता है |  इसी तरह अपनी चतुराई से बीरबल एक बार फिर से असली गुनहगार को पकड़ने में सफल होता है |

Akbar Birbal Stories In Hindi 

2 :- चोर कौन है ?

सुबह की बात है , शहंशाह अकबर सोकर उठते हैं और उन्हें बहुत प्यास लगती है | वह अपने सेवकों से पानी मांगते हैं पर उनके कमरे के आसपास कोई भी सेवक नहीं होते हैं और इसीलिए उनके इतने आवाज लगाने पर भी कोई उनके लिए पानी लेकर नहीं आता है | शहंशाह अकबर को बहुत ही गुस्सा आ रहा होता है | इतने में ही कमरे के बाहर झाड़ू लगा रहा नौकर शहंशाह की बात सुन लेता है और वह तुरंत उनके लिए एक गिलास में पानी लेकर आता है | शहंशाह अकबर को बहुत प्यास लग रही थी और इसलिए बिना यह परवाह किए कि पानी कौन ला रहा है , वह पानी पी जाते हैं |

अगले दिन शहंशाह अकबर की तबीयत बहुत खराब हो जाती है | उनकी बीमारी का पता लगाने के लिए एक हकीम साहब को बुलाया जाता है पर उन्हें कुछ नहीं समझ आ रहा होता | फिर राजवैद्य और ज्योतिषी को भी बुलाया जाता है पर वह भी कुछ नहीं कर पाते | इतने में ज्योतिषी बोलता है , की शहंशाह अकबर के तबीयत खराब होने की वजह जरूर कोई मनहूस इंसान है और उन्हें उसी की नजर लग गई है | ज्योतिषी की बात सुनकर अकबर को उस नौकर की याद आती है , जो उसके लिए पानी लेकर आया था | उन्हें यकीन हो जाता है , कि वही वह मनहूस इंसान है , जिसकी वजह से उनकी तबीयत खराब हुई है | वह उस नौकर को सजा-ए-मौत दे देते हैं | जब बीरबल को यह बात पता चलती है , तो वह उस नौकर के पास जाता है और उसे विश्वास दिलाता है , कि वह उसे इस सजा से बचा लेंगे |

बीरबल शहंशाह अकबर के पास जाते हैं और उनसे कहते हैं , कि अगर मैं आपको उस नौकर से भी ज्यादा मनहूस ज्योतिषी से मिला दूं | तो क्या आप उस नौकर को माफ कर देंगे ? अकबर कहते हैं बिल्कुल क्यों नहीं , पर उस नौकर से भी ज्यादा मनहूस कौन हो सकता है ? बीरबल कहते हैं आप शहंशाह अकबर | आप सबसे ज्यादा मनहूस है | शहंशाह को बीरबल पर बहुत गुस्सा आता है और वह उसे मनहूस कहने का कारण पूछते हैं |

बीरबल कहता है , कि उस नौकर ने आपको पानी देने की वजह से सुबह-सुबह आपका चेहरा देख लिया था जिसकी वजह से उसे मौत की सजा मिली है | उसने तो एक अच्छा काम किया पर उसके बदले उसके साथ इतना बुरा हुआ, जिसका कारण हो आप। अगर वह सुबह-सुबह आपका चेहरा देखता ही नहीं तो उसके साथ इतना बुरा होता ही नहीं | इसीलिए सबसे मनहूस तो आप है शहंशाह अकबर | बीरबल की बात सुनने के बाद शहंशाह अकबर हंसने लग जाते हैं | उन्हें बीरबल की चालाकी पर हंसी आता है , कि कितनी आसानी से उसने सारी बात पलट दी और उस नौकर को बेगुनाह साबित कर दिया | शहंशाह अकबर उस नौकर को माफ कर देते हैं और उसे उनकी सेवा करने के लिए इनाम भी देते हैं |

Akbar Birbal Stories In Hindi 

3 :- संत – अच्छा या बुरा

एक दिन शहंशाह अकबर अपने कक्ष में आराम कर रहे थे | तभी उनसे उनका सिपाही मिलने आता है वह शहंशाह के पास अपनी एक मुश्किल लेकर आता है | सिपाही शहंशाह से कहता है , कि उनकी एक भतीजी है , जिनके माता-पिता को कुछ महीने पहले एक डाकू ने मार दिया था और अब उसकी भतीजी का कहना है , कि वह डाकू गांव में एक अंधा बाबा बनकर बैठा हुआ है और गांव वालों के साथ छल कर रहा है | शहंशाह कहते हैं , कि वह अगले दिन दरबार पर उसकी इस मुश्किलात का हल निकालेंगे |

अगले दिन दरबार में शहंशाह अकबर बीरबल से कहते हैं , कि वह सच का पता लगाएं | बीरबल सिपाही से सारी सच्चाई पूछते हैं | सिपाही बताता है , कि जब एक डाकू ने उसकी भतीजी के माता-पिता को मारा था | तो वह सदमे की वजह से बोल नहीं पा रही थी | उसकी आवाज चली गई थी | मैंने एक चमत्कारी बाबा के बारे में सुना और अपनी भतीजी को उनके पास ले गया | उनके पास पहुंचते ही मेरी भतीजी जोर-जोर से चिल्लाने लगी , कि उसके माता-पिता का कातिल वह बाबा ही है | मैं तो खुश हो गया कि मेरी भतीजी की आवाज वापस लौट आई है , जिसका कारण वह चमत्कारी बाबा है | पर मेरी भतीजी कहती रही , कि असली कातिल वही है | वहाँ बैठे बाबा के भक्तों मेरी भतीजी पर बहुत गुस्सा करने लगे और इसीलिए मैं उसे चुपचाप घर ले आया | पर मुझे अब ऐसा लगता है , कि वह झूठ नहीं बोल रही | शायद सच में वह बाबा ढोंगी है और वही मेरे भैया भाभी का कातिल है |

बीरबल सारी बात ध्यान से सुन रहे होते हैं और सच का पता लगाने के लिए वह शहंशाह अकबर के साथ मिलकर एक योजना बनाते हैं | अगले दिन शहंशाह अकबर अपने दरबार के कुछ लोगों और बीरबल के साथ उस बाबा से मिलने जाता है | शहंशाह अकबर उस अंधे बाबा के लिए बहुत सारे उपहार लेकर आते हैं और उन्हें सब की तकलीफ से दूर करने के लिए धन्यवाद करते हैं | तभी बीरबल पीछे से हाथ में तलवार लेकर भागता हुआ बाबा को मारने के लिए जाता है | यह कहकर कि वह एक खूनी है | वह बाबा अपने बचाव में जल्दी से उस जगह से भाग खड़ा होता हैं | ऐसा करने पर उसकी पोल खुल जाती है | सबको समझ आ जाता है , कि वह कोई अंधा नहीं था , वह अंधा होने का और बाबा बनने का ढोंग कर रहा था और यह भी साबित हो जाता है , कि उस बच्ची के माता-पिता का कातिल भी वहीं है | शहंशाह अकबर उस कातिल को सजा-ए-मौत देते हैं | छोटी बच्ची और सिपाही अकबर का और बीरबल का धन्यवाद करते हैं | बीरबल कहता है , कि जब बात हमारे जान पर आ जाती है तो हम सब कुछ भूल जाते हैं और गलती कर बैठते हैं | यही गलती उस कातिल ने की और वह पकड़ा गया |


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