बंदर की कहानी – Panchang Story In Hindi

बंदर की कहानी :- एक घने जंगल में एक बड़े से पेड़ मे एक चिड़िया अपने बच्चों के साथ अपने घोसले में रहती थी| वह चिड़िया अपने बच्चों का बहुत ख्याल रखती थी| वह सुबह से खाने की तलाश में निकल जाती थी और शाम को बहुत सारा भोजन लेकर आती थी , ताकि वह अपने बच्चों का पेट भर सके|

उसी पेड़ में एक बंदर भी रहता था| वह बंदर बहुत ही मनमौजी था और उछल कूद करते रहता था| बारिश का मौसम आने वाला था , इसीलिए चिड़िया भागा दौड़ी कर रही थी और अपने घोसले को बड़ा बना रही थी | ताकि बारिश और तूफान से वो खुद को और अपने बच्चों को बचा सके|

चिड़िया को ऐसा करते देख बंदर उस पर बहुत हस्ता है और कहता है , कि कल किसने देखा है , क्या फायदा इतनी मेहनत करने का आज में जियो और मस्त रहो| चिड़िया उसके बातों को नजरअंदाज करती है और वह तिनका- तिनका चुन- चुन कर अपने घोसले को बहुत बड़ा बना लेती है और उसे एक पत्ते से ढक देती है|

अब बारिश का मौसम आता है| बारिश में चिड़िया बड़े ही आराम से अपने घोसले में अपने बच्चों के साथ रहती है क्योंकि उसने उससे बचने के सारे इंतजाम कर लिए थे और साथ में उसने बहुत सारा खाना भी इकट्ठा कर लिया था ताकि खाने की खोज में उसे बाहर ना जाना पड़े|

दूसरी ओर बंदर बारिश और ठंड से बहुत परेशान था| वह भूखा भी था क्योंकि वह खाने की खोज में कहीं जा आ नहीं सकता था|

उसकी हालत को देखकर चिड़िया उसे समझाती है , कि अगर उसने उस वक्त मेहनत कर ली होती , खुद को बारिश से बचाने की , तो आज उसकी यह हालत ना होती|

चिड़िया कहती है , कि आज में जीना जरूरी है परंतु इसका मतलब यह नहीं कि हम कल के आने वाले संकट के लिए तैयार ना रहे और आज वो अपनी बेवकूफी के ही कारण इस दशा में है और यह सब झेल रहे है।

बंदर को चिड़िया पर बहुत गुस्सा आता है और वह लात मारकर उसका घोंसला तोड देता है , जिससे उसका घोंसला टूट जाता है और उसके बच्चे भी जमीन में गिर जाते हैं|

चिड़िया रोते हुए बंदर से कहती है , कि उसकी क्या गलती थी जो उसने उसके साथ ऐसा सलूक किया|

बंदर की कहानी


शिक्षा:- कहानी ( bandar aur chidiya ki kahani ) से हमें यह शिक्षा मिलती है , कि जब आप एक मूर्ख को कुछ समझाने की कोशिश करते हैं , तो अपना ही नुकसान करते हैं , क्योंकि एक मूर्ख किसी की बात नहीं समझता है | उसे सिर्फ वही सही लगता है और बाकी सारे लोग गलत|


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