बंदर की कहानियाँ – Bandar Ki Kahani In Hindi

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Bandar Ki Kahani

Bandar Ki Kahani – बंदर की कहानियाँ

1:- बंदर और मछली ( Bandar Aur Machli Ki Kahani ) 

एक घना जंगल था और उस जंगल में एक बंदर रहता था| उस जंगल से थोड़ी दूर एक खूबसूरत सा तालाब था | जिसके पास एक आम का पेड़ था| एक दिन भटकते-भटकते बंदर उस तालाब के पास पहुंचता है और वह उस आम के पेड़ को देखता है , जिसमें बहुत ही सारे सुनहरे पके आम लगे हुए थे| बंदर उस पेड़ को देखकर बहुत खुश होता है और सोचता है , कि अब उसे रोज स्वादिष्ट भोजन करने को मिलेगा| वह उस पेड़ से एक बड़ा सा आम खाता है और वापस चला जाता है| अगले दिन वह फिर आता है एक आम खाता है और वापस चला जाता है| कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता है|

एक दिन जब बंदर आम के पेड़ के पास आता है | तो वह देखता है , कि उस पेड़ में सिर्फ एक ही आम बचा हुआ है और वह सोचता है , कि वह उस आखिरी आम को बड़े ही मजे से खाएगा| बंदर आम तोड़ने के लिए हाथ बढ़ाता है , कि तभी वह आम टूटकर तालाब में गिर जाता है| बंदर को बहुत रोना आता है , क्योंकि वह उस आखरी आम को बहुत स्वाद लेकर खाना चाहता था| तभी वह देखता है , कि तालाब से एक बहुत ही विशाल और खूबसूरत मछली उसका आम लेकर आ रही है|

मछली को आम लाता देख बंदर उससे कहता है , कि क्या वह आम उसे दे सकती है | क्योंकि वह उससे धोखे से तालाब में गिर गया था| मछली बंदर की बात मान जाती है और उसे आम दे देती है| बंदर बहुत खुश होता है और वह मछली को अपना दोस्त बना लेता है और उससे वादा करता है , कि जब भी उसे उसकी जरूरत पड़ेगी वह उसकी मदद जरूर करेगा| मछली इस बात पर बहुत खुश होती है और बंदर से उसे अपना दोस्त बनाने के लिए धन्यवाद कहती है| अब बंदर रोज तालाब के पास आता और किनारे में बैठकर दोनों एक दूसरे से बहुत सारी बातें करते| कुछ दिनों में उनकी दोस्ती बहुत ही गहरी हो गई|

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एक दिन तालाब में एक मछुआरा आता है और मछली पकड़ने के लिए वह तालाब में जाल छोड़कर कुछ दूर बैठ जाता है| बदकिस्मती से उस जाल में वह मछली फस जाती है| तभी हर रोज की तरह बंदर मछली से मिलने आता है और उसे जाल में फंसा देखकर वह चिंतित हो जाता है| मछली बंदर से कहती है , कि वह उसकी जाल से निकलने में मदद करें वरना वह लोग उसे मारकर खा जाएंगे| बंदर मछली से वादा करता है , कि वह उसे कुछ भी नहीं होने देगा| बंदर अपना दिमाग दौडाता है , कि वह कैसे अपनी दोस्त की मदद करेगा| तभी वह देखता है , कि किनारे पर मछुआरा अपना सामान रख कर गया है| बंदर उस सामान में से मछुआरे के पैसों की थैली चुरा लेता है और आम के पेड़ पर चढ़ जाता है|

जब मछुआरा जाल निकालने के लिए तालाब के पास पहुंचता है | तब उसे बंदर आवाज लगाता है और उसे उसके पैसों की थैली दिखाता है| मछुआरा बहुत डर जाता है और वह बंदर से कहता है , कि  वह उसे उसकी थैली वापस कर दे | क्योंकि वह उसके महीने भर की कमाई है| बंदर कहता है , कि वह उसकी थैली वापस कर देगा अगर वह उसकी दोस्त को छोड़ दे तो| मछुआरे के पास कोई विकल्प नहीं था और इसीलिए वह मछली को छोड़ देता है और अपने किए वादे अनुसार बंदर पैसे की थैली मछुआरे को वापस कर देता है|

इस तरह से बंदर मछली की जान बचा लेता है|

शिक्षा:- इस Bandar Ki Kahani से हमें यह सीख मिलती है , कि असली दोस्त वही होता है जो बुरे समय में आपके काम आए और उस मुसीबत से आपको बाहर निकाले|



2:- बंदर और खरगोश ( Bandar And Rabbit Story In Hindi ) 

यह कहानी एक बंदर और खरगोश की है | जो कि एक घने जंगल में रहा करते थे| बंदर और खरगोश दोनों एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त थे| उनके दोस्ती की चर्चा पूरे जंगल में होती थी| वे दोनों अपना सारा वक्त एक दूसरे के साथ बिताते थे| वे साथ खाते, साथ खेलते और अपना सारा काम साथ में ही करते थे| उन दोनों की दोस्ती बहुत प्यारी थी और उनका रिश्ता काफी अनोखा|

एक दिन की बात है , बंदर और खरगोश सामान्य दिन की तरह जंगल में घूम रहे थे| तभी वे देखते हैं , कि जंगल के बाकी सारे बड़े जानवर बहुत तेजी से भाग रहे हैं| बंदर और खरगोश को समझ नहीं आता है , कि वह सब ऐसा क्यों कर रहे हैं| तभी उन्हें सामने से एक लोमड़ी आती हुई दिखाई देती है और बंदर उससे पूछता है , कि वे भाग क्यों रहे हैं ? लोमड़ी बंदर और खरगोश को बताती है , कि जंगल में एक शिकारी आया है और वह उन सब को मारना चाहता है| लोमड़ी की यह बात सुनकर बंदर और खरगोश बहुत ही ज्यादा डर जाते हैं | उन्हें समझ नहीं आता है , कि वह करे तो क्या करें|


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लोमड़ी और खरगोश भी अपनी अपनी जान बचाने के लिए बहुत तेज भागते हैं और भागते – भागते , वे जंगल से बहुत दूर चले जाते हैं| वे दोनों इतनी दूर तक पहुंच गए थे , कि अब वे शिकारी से सुरक्षित थे , क्योंकि अब वह शिकारी उन तक नहीं पहुंच पाता| बहुत देर तक भागने के कारण बंदर और खरगोश को प्यास लगती है और वे अपने आसपास पानी ढूंढने लगते हैं| तभी थोड़ी दूर पर उन्हें पानी से भरा एक मटका दिखता है पर पास आने पर उन्हें पता चलता है , कि उस मटके में बहुत ही थोड़ा पानी है| कम पानी देखकर बंदर और खरगोश को समझ नहीं आता है , कि वह क्या करें|

खरगोश बंदर से कहता है , कि वह सारा पानी पी ले | क्योंकि उछल- उछल कर चलने के कारण वह ज्यादा थका होगा| बंदर खरगोश की बात नहीं मानता और वह खरगोश से कहता है , कि वह उससे बहुत छोटा है और इसीलिए वह जादा थका हुआ होगा , इसलिए पानी वह पी ले।

बंदर और खरगोश दोनों एक दूसरे को पानी पिलाने की जिद में लगे थे| तभी सामने से एक हाथी आता है और वह बंदर और खरगोश से पूछता है , कि वह पानी क्यों नहीं पी रहे हैं ?  बंदर और खरगोश दोनों हाथी को स्पष्टीकरण देते हैं , कि वह चाहते हैं कि उसका दोस्त पानी पिए | हाथी उनकी बात सुनकर बहुत खुश होता है और कहता है , कि ऐसी दोस्ती उसने कभी नहीं देखी और उनकी दोस्ती को हमेशा याद रखा जाएगा|

हाथी उन्हें सुझाव देता है , कि वह दोनों मटके में जितना भी पानी है , उसे आधा-आधा बांट कर पी ले| उन्हें हाथी का सुझाव बहुत पसंद आता है और वह वैसा ही करते हैं| दोनों की प्यास बुझ जाती है और वह खुशी-खुशी जंगल की ओर वापस  निकल जाते हैं|

शिक्षा:- इस Bandar Ki Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है , कि सच्ची दोस्ती वही है , जिसमें कोई स्वार्थ नहीं है | जिसमें आप खुद से पहले अपने दोस्तों के बारे में सोचते हैं|


तो अंत में दोस्तों , आपको हमारी यह कहानी ( Bandar Ki Kahani ) कैसी लगी ? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं | यदि आपको हमारी यह बंदर की कहानियां अच्छी लगी है ,तो उसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें |

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