चिड़िया और बंदर की कहानी – Chidiya Aur Bandar Ki Kahani

Chidiya Aur Bandar Ki Kahani – चिड़िया और बंदर की कहानी

Chidiya Aur Bandar Ki Kahani :- एक समय की बात है , जब ठंड का मौसम था और एक चिड़िया अपने घोसले में आराम कर रही थी| तभी दो बंदर आकर उस पेड़ के नीचे खड़े होते हैं और बाते करते हैं| बंदरों को बहुत ठंड लग रही थी क्योंकि वहां पर बहुत ही तेज शीतलहर चल रही थी| दोनों बंदर खुद को उस ठंड से बचाने का उपाय सोचने लगते हैं| उन्हें समझ नहीं आता है , कि वह क्या करें । तभी एक बंदर सुझाव देता है , वे सूखे पत्ते इकट्ठे कर उसे जलाकर खुद को गरम रख सकते हैं| दूसरा बंदर भी सुझाव पर सहमति दिखाता है और वह दोनों सूखे पत्ते इकट्ठे करने लग जाते हैं| अब उनहे आग जलानी थी पर उन्हें समझ नहीं आ रहा था , कि वह कैसे जलाएं|

वो पास से एक जुगनू को गुजरते देखते हैं और उसमें से एक बंदर उस जुगनू को अपने हाथ में पकड़ लेता है| वह बंदर कहता है , कि हम इस जुगनू की मदद से आग जलाएंगे| एक बंदर उस जुगनू को पत्तों के बीच पकड़कर रखेगा , तो दूसरा उसमें फूंक मारेगा| बंदरों की इन सारी हरकतों को चिड़िया अपने घोसले में बैठे देख रही थी| वह चिड़िया उन बंदरों से कहती है , कि जुगनू से आग जलाना मुमकिन नहीं है और अगर उन्हें आग जलानी है , तो वह दो पत्थरों को घिसकर जलाएं| दोनों बंदर चिड़िया की बात को नजरअंदाज करते हैं और जुगनू की मदद से आग जलाने की कोशिश करने में लगे रहते हैं|

चिड़िया बार-बार उन्हें समझा रही थी , कि वह करना मुमकिन नहीं है| दोनों बंदर चिड़िया पर बहुत गुस्सा करते हैं , उसे डांट फटकार कर वापस भेज देते हैं और उससे कहते हैं , कि वह एक मूर्ख है और उसे कुछ नहीं आता| इतना बुरा व्यवहार करने के बावजूद भी चिड़िया उन बंदरों की मदद करना चाहती थी , ताकि वह आग जलाकर इस ठंड से खुद को बचा सके|

वह सोचती है , कि एक बार और उन्हें जाकर समझाए कि ऐसे आग जलाना मुमकिन नहीं है| इस बार बंदरों को उस पर बहुत गुस्सा आ जाता है और वह उसका घोंसला तहस-नहस कर देते हैं और उसे घायल भी कर देते हैं| और इस तरह से दूसरे का भला करने पर चिड़िया का खुद ही नुकसान हो जाता है|

शिक्षा :- मंदबुद्धि जीवो को समझाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है | यदि आप उन्हें समझाते हैं , तो उसमें नुकसान आपका ही है | क्योंकि उन्हें तो सिर्फ समय की फटकार ही समझा सकती है |


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